SOOKOON-E-ROOH

kuch pal sookoon ke…

‘‘ वो पुराने चाँदी के ज़ेवर ’’

वो बहुत ही पुराने हैं
बङे ही भारी हैं
इस महगें ज़माने में
लगभग बेदाम हैं
पर मुझे बेहद पसन्द हैं वो
क्योंकि अनमोल हैं
एंटीक हैं
आजकल ऐसे ज़ेवर मिलते कहाँ हैं ।
फिर उनमें कुछ बात है
उन पर टंके ज़वाहरात
वो पुरानी कशीदाकारी
आज के जमाने से बिलकुल अलग
वो नायाब हैं ।
मेरे दिल के बङे ही क़रीब हैं वो
जानती हूँ उनके दामों कुछ न मिलेगा
फिर बिकाउ ही कहाँ हैं वो ।
वो तो बस सहेजने की चीज़ हैं ।
गाहे बगाहे पोटली से निकालो
प्यार भरी नज़र डालो
अन्दर से बाहर से अच्छे से
तबीयत से साफ करो
और सहज ही वापिस रख दो
उनकी उम्र बढ़ती है
वो पुराने चाँदी के ज़ेवर हैं ।
मुझे , आपको , हम सभी को उन्हें
बङे ध्यान से रखना चाहिए ।
इस चोर ज़माने में अकेले छोङने की
चीज़ नहीं हैं वो
और ना ही वृद्धआश्रमों में छोङ आने की ।
‘‘पुराने चाँदी के ज़ेवर हैं वो ।’’

October 3, 2008 - Posted by poonamparinita | HINDI POETRY | | No Comments Yet

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