SOOKOON-E-ROOH

kuch pal sookoon ke…

‘मुस्कान–एक महिने की !’

तुम्हारे छोटे-छोटे बन्द होठों पे,
ये लम्बी सी मुस्कान आई!
जाने क्या देखा होगा ख्वाब तुमने,
चाहो भी तो बता न पाओगी,
बस समझ ही लेना होगा हमें खुद से,
अपनी ही खुशी से कि तुम खुश हो,
प्रकृति की इस दुनिया में आकर!
बस युं ही मुस्कुराते रहना और,
बिखेरना खुशियाँ उन सब में,
जो तुम्हे चाहे, तुम्हे अपनाऐ,
और लेना चाहे, तुम्हे अपने
थोङा, थोङा और पास ।

October 14, 2008 - Posted by poonamparinita | HINDI POETRY | | 1 Comment

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  1. wah wah!

    Comment by kavi kulwant | October 22, 2008 | Reply


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