‘‘वो पीला वाला गुब्बारा…’’
नहीं वो नहीं भईया
वो नीले वाले के पीछे
वो, हाँ वो, बङा सा पीला वाला गुब्बारा
वो ही चाहिए मुझे ।
नहीं, नया फुला कर नहीं देना
बस वही वाला चाहिए
वो बङा सा पीला वाला गुब्बारा ।
ना, रंग बिरंगा नहीं
बस वही, हाँ बस वही….
आज इस उम्र में भी
मेरे अन्दर इक बच्चा
यूँ ही ज़िद करता है
बस मचल-2 उठता है
ना वक़्त देखता है
ना मेरी उम्र
ना हालात
वो तो ये भी नहीं देखता कि
कहीं कोई गुब्बारे वाला नहीं है
और ना ही कहीं कोई पीला वाला गुब्बारा…..
-
Archives
- November 2008 (5)
- October 2008 (10)
- September 2008 (2)
- July 2008 (6)
-
Categories
-
RSS
Entries RSS
Comments RSS