“मेरी बगिया में महकते रिश्ते”
आज एक लेख पढ कर
रिश्तो को एक नये रुप मे देखा
अपने घर के पिछवाडे़
अपनी बगिया मे जो कदम रखा
तो और दिनो से बिल्कुल अलग था
वो सफेद गुलदावरी का पॉधा
वो मेरा बेटा है
बहुत ही प्यारा फूलो से लक-दक
उससे नजरे हटती ही नही
पूरी बगिया में सबसे पहले नजरे उसी पर टिकती है
उसके साईज को ले कर मैं हमेशा सोचती हूँ
कि ये और बडा, और बडा हो जाए तो
ज्यादा अच्छा लगे
वो दूसरे कोने में लगा मुस्कुराता सा लाल गुलाब
वो मेरे पति है
इन्हीं से ये बगिया रोशन है
बगिया के सारे फूलों के रंगो को अपने मे समाहित रखते हैं
फिर भी अपनी एक अलग पहचान, मुस्कान और शान रखते हैं
वो सचमुच राजा हैं इस बगिया के
बगिया में छोटे पौधौं और फूलों के बीच
बडी ही माकूल जगह एक शीशम का पेड खडा है
उसे पता है बगिया में कब कितनी धूप और कितनी छावँ वाछिँत है
वो सासू माँ है
बिल्कूल तटस्थ एकदम मुस्तैद
कभी-कभी लगता है जब सब सो जाते है
तब ये पेड ही सब पर नजर रखता है
सबके खाद पानी पर निगरानी रखता है
और सबको बस अपनी नजरों से
ही व्यवहारिक ज्ञान सिखाता रहता है
ये जो नरम मुलायम घास है ना
ये हमारा कुता जानी है
हर वक्त आमत्रण सा निहीत है इसमें
आओ मेरे साथ खेलो
लोटपोट हो जाओ मुझमें
भूल जाओ सारे तनाव
अपनी सारी परेशानियाँ समा जाने दो मुझ में
बस दो घडी, आओ मेरे पास आओ
और ये जो हरी पतियों और सफेद फूलों वाला चाँदनी का पेड है ना
ये मैं हूँ
हाँ, इस घर की, बगिया की
चाँदनी सी मैं, पूनम परिणिता
कहते है ना कि सफेद रंग से ही सारे रंग बनते है
बिल्कूल सच है
बीच-बीच में बगिया मे मेहमानों से
मौसमी फूल पौधे आते जाते रहते है
छोड जाते हैं अपनी मुस्कान, अपने रंग
अब ये हम पर होता है कि
हम उनसे क्या सीखते हैं
आप भी आज जब अपनी बगिया में जाऐगें
अपने पौधौ को देख कर प्यार से मुस्कुराऐगें
तब
देखते ही देखते फूल सारे रिश्तों में बदल जाऐगे
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